Manjil ki Talash मंजिल की तलाश
जाने कहाँ है मेरी मंजिल
क्यों मुझसे खफा है वह
मै दर-दर भटक रहा हूँ
एक पल आशा है दूसरे पल उदासी छायी है
यहाँ भी मैंने देखा है
वहाँ भी मैंने देखा है
कही नजर नही आती
जाने कहाँ है मेरी मंजिल
क्यों मुझसे खफा है
उसकी तलास में मैं कब से भटक रहा हूँ।
माँ- बाप की ऊँची अपेक्षाये
मुझे अपनी क्षमता की
नही है सही पहचान
कौन सी मंजिल चुने हम
यहॊ सोच-सोच कर हम हैं परेशान
कहाँ होगी मेरी तलाश
जाने कहाँ है मेरी मंजिल
क्यों मुझसे खफा है
मुझे डर है उसकी तलाश में
भटक न जाऊँ कही दूर।
जहाँ से मुड़ना भी हो मुश्किल
और मैं ऊँची अपेक्षाओं मे दब कर
टूट कर बिखर न जाऊँ कही
और सदा के लिये उससे दूर हो जाऊँ
जाने कहाँ है मेरी मंजिल
क्यों मुझसे खफा है वह
Manoj k Maurya
Monday, July 13, 2009
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